What is Internet its History and Architecture इंटरनेट क्या है इसका इतिहास और संरचना

What is Internet its History and Architectureइन्टरनेट क्या है – इन्टरनेट हजारों लाखों स्वतंत्र नेटवर्कों का ऐसा संयुक्त नेटवर्क है जिसमें प्रत्येक नेटवर्क एक ऐसे माध्यम से जुड़ा होता है, जिसकी सहायता से यह अन्य नेटवर्क से सूचनाओं का आदान प्रदान करता है।

What is Internet its History and Architecture

इंटरनेट क्या है इसका इतिहास और संरचना

इन्टरनेट क्या है – इन्टरनेट हजारों लाखों स्वतंत्र नेटवर्कों का ऐसा संयुक्त नेटवर्क है जिसमें प्रत्येक नेटवर्क एक ऐसे माध्यम से जुड़ा होता है, जिसकी सहायता से यह अन्य नेटवर्क से सूचनाओं का आदान प्रदान करता है। इन्टरनेट का अविष्कार सन् 1969 में हुआ था, जब अमेरिका के रक्षा विभाग ने अनेिट (ARPANET: Advanced Research Projects Network) नामक प्रोजेक्ट प्रारम्भ किया। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य अमेरिकी रक्षा विभाग और विभिन्न अमेरिकी विश्वविद्यालयों के कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ना था। इसका प्रारम्भ उन इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों तथा शोधकर्ताओं के बीच सूचना तथा सन्देशों के आदान प्रदान से किया गया था जो सभी इसी System के भाग थे। इसकी उपयोगिता को देखकर बहुत से निजी संस्थाओं में अपने-अपने नेटवर्क बना लिये, जो बाद में अनेिट से जुड़ गये और इस प्रकार इन्टरनेट का जन्म हुआ।

इन्टरनेट का इतिहास History of Internet

इन्टरनेट का इतिहास – इन्टरनेट का अविष्कार सन् 1969 में हुआ था, जब अमेरिका के रक्षा विभाग ने अर्पानेट (ARPANET: Advanced Research Projects Network) नामक प्रोजेक्ट प्रारम्भ किया। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य अमेरिकी रक्षा विभाग और विभिन्न अमेरिकी विश्वविद्यालयों के कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ना था। इसका प्रारम्भ उन इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों तथा शोधकर्ताओं के बीच सूचना तथा सन्देशों के आदान प्रदान से किया गया था जो सभी इसी System के भाग थे। इसकी उपयोगिता को देखकर बहुत से निजी संस्थाओं नें अपने- अपने नेटवर्क बना लिये, जो बाद में अर्पानेट से जुड़ गये और इस प्रकार इन्टरनेट का जन्म हुआ। नई दिल्ली स्थित नेशनल इनफॉरर्मेशन सेन्टर (NIC) भारत में इन्टरनेट कनेक्शन प्रयोग करने वाला प्रथम संस्थान था। भारत सरकार के उपक्रम VSNL विदेश संचार निगम लिमिटेड ने 15 अगस्त 1995 में व्यवसायिक रूप से प्रथम इन्टरनेट सेवा प्रदान की.

Internet Architecture इन्टरनेट की संरचना

इन्टरनेट की संरचना – इन्टरनेट मूलतः क्लाइंट-सर्वर आर्किटेक्चर (Client-server Architecture) पर आधारित नेटवर्क है। इसमें किसी उपयोगकर्ता के कम्प्यूटर को, जिसे क्लाइंट कहा जाता है, किसी सर्वर से. जोड़ा जाता है, जो इन्टरनेट से सीधे जुड़ा होता है उन्हें वेब सर्वर भी कहा जाता है, क्योंकि उन पर वेबसाइटों को संग्रहित किया जाता है। प्रत्येक कम्प्यूटर उपयोगकर्ता किसी वेब सर्वर के माध्यम से ही इन्टरनेट की सेवाओं का उपयोग कर सकता है। क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर की सभी विशेषताएँ इन्टरनेट में पायी जाती हैं। इन्टरनेट क्योंकि नेटवर्कों का नेटवर्क है, इसलिए सामान्यतया उपयोगकर्ताओं को उससे सीधे नहीं जोड़ा जाता। इसके बजाय उन्हें किसी छोटे नेटवर्क से जोड़ा जाता है, जो गेटवे के माध्यम से इन्टरनेट के बैकबोन से जोड़े जाते है। कोई गेटवे एक ऐसा उपकरण है, जो दो भिन्न प्रकार के नेटवर्कों को जोड़ता है। बैकबोन ऐसा केन्द्रीय ढाँचा होता है, जो दो या दो से अधिक नेटवकों को जोड़ता है। इसे अग्रांकित चित्र में दिखाया गया है :

Internet Architecture इन्टरनेट की संरचना
Internet Architecture इन्टरनेट की संरचना

इन्टरनेट से जुड़ा कोई कम्प्यूटर किसी नाम या पते से पहचाना जाता है। आप नेटवर्क के किसी कम्प्यूटर से किसी दूसरे कम्प्यूटर को कोई भी डाटा, सूचना या संदेश भेज सकते हैं। निजी जाने वाली प्रत्येक सूचना को कई छोटे भागों में तोड़ा जाता है, जिन्हें पैकेट कहते हैं। प्रत्येक पैकेट अलग से भेजा जाता है और जब सभी प्राप्त हो जाते हैं, तो उन्हें जोड़कर मूल सूचना बना ली जाती है। इन्टरनेट को सुचारु रूप से चलाने के लिए यह आवश्यक है कि इससे जुड़ा हर कम्प्यूटर संचार के समान नियमों का पालन करें ऐसे नियमों के सतह को प्रोटोकॉल (Protocol) कहा जाता है। इन्टरनेट द्वारा प्रयोग किया जाने वाला संचार प्रोटोकॉल टीसीपी/आईपी (TCP/IP) है। यह प्रोटोकॉल दो भागों में है। पहला भाग टीसीपी (TCP, Transmission Control Protocol) है जो किसी फाइल या संदेश को स्त्रोत कम्प्यूटर में ही पैकेटों में बाँटने के लिए उत्तरदायी है। यह प्राप्तकर्ता कम्प्यूटर को प्राप्त होने वाले पैकेटों को फिर से जोड़ने के लिए भी उत्तरदायी है। दूसरा भाग आईपी (IP : Internet Protocol) प्राप्तकर्ता कम्प्यूटर के पते को संभालने के लिए उत्तरदायी है, ताकि प्रत्येक पैकेट सही रास्ते से भेजा जाये। इन दोनों प्रोटोकॉलों को मिलाकर टीसीपी/आईपी कहा जाता है।

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