Sun. Sep 19th, 2021
Weekly Current Affairs Test

Weekly Current Affairs Test :- winitra.com पूरे सप्ताह से चुनिंदा एवं महत्वपूर्ण टॉप-10 साप्ताहिक करेंट अफेयर्स घटनाक्रम प्रस्तुत कर रहा है. इसमें मुख्य रूप से–गौतम अडाणी  और कोरोना वायरस आदि शामिल हैं.

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Weekly Current Affairs Test 17 to 23 May 2021

Weekly Current Affairs Test :- winitra.com पूरे सप्ताह से चुनिंदा एवं महत्वपूर्ण टॉप-10 साप्ताहिक करेंट अफेयर्स घटनाक्रम प्रस्तुत कर रहा है. इसमें मुख्य रूप से–गौतम अडाणी  और कोरोना वायरस आदि शामिल हैं.

1.गौतम अडानी बने एशिया के दूसरे सबसे अमीर शख्स, जानें पहले स्थान पर कौन

भारत के दिग्गज उद्योगपति गौतम अडाणी एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. ब्लूमबर्ग बिलिनियर्स इंडेक्स के अनुसार संपत्ति के मामले में चीन को झोंग शानशान (Zhong Shanshan) को पछाड़कर अडाणी ने यह स्थान हासिल किया है. वे एशिया के दूसरे सबसे अधिक अमीर शख्स बन गए है.

अडाणी समूह के कंपनियों के शेयरों में पिछले कुछ माह में जबरदस्त तेजी की बदौलत वैश्विक अमीरों की लिस्ट में गौतम अडाणी के स्थान में लगातार सुधार हुआ है. वे ब्लूमबर्ग की इस लिस्ट में 14वें स्थान पर पहुंच गए हैं. एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी 13वें स्थान पर हैं. इस तरह अडाणी ब्लूमबर्ग लिस्ट में अंबानी से एक पायदान ही पीछे हैं.

गौतम अडानी की कुल नेट वर्थ

ब्लूमबर्ग बिलिनियर्स इंडेक्स के अनुसार गौतम अडानी की कुल नेट वर्थ 66.5 बिलियन डॉलर है. इस साल गौतम की संपत्ति में लगभग 32.7 डॉलर का इजाफा देखने को मिला. वहीं अंबानी की कुल संपत्ति 76.5 बिलियन डॉलर आंकी गई है. वहीं, चीन के झोंग शानशान की कुल नेट वर्थ 63.6 बिलियन डॉलर रहा.

बिल गेट्स चौथे स्थान पर

मुकेश अंबानी ने फरवरी महीने में चीन के शानशान को पीछे छोड़ दिया था और वो एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए थे. बता दें, साल 2021 की शुरुआती महीनों में शानशान ने दुनिया के सबसे अमीर लोगों की श्रेणी में छठे स्थान पर अपनी जगह बनायी थी.

वहीं, ब्लूमबर्ग बिलिनियर्स इंडेक्स के अनुसार माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स की कुल संपत्ति 141 बिलियर डॉलर रही और चौथे स्थान पर हैं. फेसबुक के मार्क जुकरबर्क पांचवे स्थान पर हैं.

दुनिया के टॉप 10 अमीर

अमीर व्यक्ति  देश  नेट वर्थ
जेफ बेजोसअमेरिका18900 करोड़ डॉलर
एलन मस्कअमेरिका16300 करोड़ डॉलर
बरनार्ड अरनाल्टफ्रांस16200 करोड़ डॉलर
बिल गेट्सअमेरिका14200 करोड़ डॉलर
मार्क जुकरबर्गअमेरिका11900 करोड़ डॉलर
वॉरेन बफअमेरिका  10800 करोड़ डॉलर
लैरी पेजअमेरिका  10600 करोड़ डॉलर
सरजेई बिनअमेरिका10200 करोड़ डॉलर
लैरी एलिसनअमेरिका 9120 करोड़ डॉलर
स्टीव बामरअमेरिका 8920 करोड़ डॉलर

6 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टेड

अडानी ग्रुप की 6 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टेड है. इन कंपनियों में अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल जोन, अडानी टोटल गैस, अडानी ट्रांसमिशन, अडानी पावर और अडानी ग्रीन एनर्जी शामिल हैं.

2.आतंकवाद विरोधी दिवस 2021: जानिए इस दिवस का इतिहास और महत्व

भारत हर साल 21 मई को राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस (National Anti-Terrorism Day) मनाता है. यह दिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है. इस बार यह दिवस कोरोना वायरस महामारी के बीच मनाया जा रहा है.

प्रत्येक साल 21 मई को मनाए जाने वाले आतंकवाद विरोधी दिवस पर युवाओं सहित समाज के अन्य वर्गों को आतंकवाद विरोधी शपथ दिलाई जाती है. आतंकवाद विरोधी दिवस मनाने का उद्देश्य राष्ट्रीय हितों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों, आतंकवाद के कारण आम जनता को हो रहीं परेशानियों, आतंकी हिंसा से दूर रखना है.

उद्देश्य

आतंकवाद विरोधी दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य युवाओं को आतंकवाद और हिंसा के पथ से दूर रखना, शांति और मानवता का संदेश फैलाना, लोगों को जागरूक करना, एकता को बढ़ावा देना, युवाओं में देशभक्ति जगाना और आम लोगों की पीड़ा को उजागर करना है.

आतंकवाद विरोधी दिवस क्यों मनाया जाता है?

तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में 21 मई 1991 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी. उनकी हत्या के बाद ही 21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया गया था.

कैसे हुई हत्या?

राजीव गांधी जिस समय रैली को संबोधित कर रहे थे उसी दौरान एक महिला अपने शरीर पर विस्फोटक लगाकर आई. वह राजीव गांधी के पैर छूने के लिए जैसे ही झुकी, तेज धमाका हुआ और इसमें राजीव गांधी समेत लगभग 25 लोगों की मौत हो गई. रिपोर्ट के अनुसार, मानव बम बनकर आई इस महिला का संबंध आतंकवादी संगठन एलटीटीई से था.

यह दिवस किस तरह मनाया जाता है?

आतंकवाद विरोधी दिवस के दिन ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मृत्यु हुई थी इसलिए इस रोज कई जगहों पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है. आतंकवाद और उसके दुष्प्रभावों को उजागर करने के लिए बड़े पैमाने पर शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इस दिन रैलियां निकालकर भी लोगों को जागरूक किया जाता है.

राजीव गांधीके बारे में

राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई (महाराष्ट्र) में हुआ था. इनकी माता का नाम इंदिरा गांधी और पिता का नाम फिरोज गांधी था. राजीव गांधी के परिवार में पत्नी सोनिया गांधी और 2 संतानें राहुल व प्रियंका गांधी हैं.

वे साल 1981 में उत्तरप्रदेश की अमेठी सीठ से सांसद बने. वे 1985 से 1991 तक कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को हत्या के बाद राजीव गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाया गया.

जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई तो राजीव गांधी को उसी दिन प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई. वे 31 अक्टूबर 1984 से 1 दिसंबर 1989 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे. उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया गया.

3.केंद्र सरकार ने राज्यों से ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करने को कहा, जानें वजह

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ब्लैक फंगस संक्रमण (म्यूकर माइकोसिस) को महामारी रोग अधिनियम, 1897 के तहत अधिसूच्य बीमारी बनाकर सभी मामलों की सूचना देने का आग्रह किया है. कोरोना महामारी के दौरान अब ब्लैक फंगस चिंता का कारण बन गया है.

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर ब्लैक फंगस के लिए अलर्ट किया है. वहीं राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, तेलंगाना और तमिलनाडु इस ब्लैक फंगस को पहले ही महामारी घोषित कर चुके हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को इसकी जांच, निदान और प्रबंधन पर स्वास्थ्य मंत्रालय व आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा.

इन राज्यों में ब्लैक फंगस के मामले

कर्नाटक, उत्तराखंड, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा और बिहार सहित देश के विभिन्न हिस्सों में ब्लैक फंगस के मामले सामने आए हैं. म्यूकोर्मिकोसिस, जो मुख्य रूप से कोविड-19 से उबरने वाले लोगों को प्रभावित कर रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस संक्रमण से कोविड-19 के रोगियों में मौतों की संख्या बढ़ी है.https://platform.twitter.com/embed/Tweet.html?

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने क्या कहा?

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे एक पत्र में कहा है कि फंगस संक्रमण का परिणाम कोविड रोगियों में दीर्घकालिक रुग्णता और मौतों की संख्या में वृद्धि के रूप में सामने आ रहा है. उन्होंने कहा कि इस संक्रमण के उपचार के लिए विभिन्न नज़रियों पर गौर किये जाने की ज़रूरत है जिसमें आँखों के सर्जन, कान-नाक-गला विभाग के विशेषज्ञों, सामान्य सर्जन और अन्य का दृष्टिकोण शामिल हो.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्या कहा?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि सभी सरकारी, प्राइवेट स्वास्थ्य केंद्रों, मेडिकल कॉलेजों को म्यूकरमाइकोसिस की स्क्रीनिंग, डायग्नोसिस, और मैनेजमेंट के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर की ओर से जारी गाइडलाइंस का पालन करना होगा. मंत्रालय ने कहा है कि ये सभी संस्थान सभी पुष्ट और संभावित केसों की जानकारी जिला स्तर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के जरिए चिकित्सा विभाग को देंगे.

महामारी कब घोषित होती है

विश्व स्वास्थ्य संगठन की परिभाषा के मुताबिक जब कोई बीमारी संक्रमण के जरिये बड़ी संख्या को प्रभावित करती है और फिर इसका प्रकोप सामान्य की अपेक्षा अधिक होता है तो इसे महामारी घोषित कर दिया जाता है. किसी बीमारी के महामारी होने की घोषणा उसके कारण होने वाली मौतों और पीड़ितों की संख्या पर भी निर्भर करती है.

ब्लैक फंगस: एक नजर में

ब्लैक फंगस एक गंभीर लेकिन दुर्लभ फंगल संक्रमण है जो म्यूकोर्मिसेट्स नामक मोल्डों के समूह के कारण होता है. ये मोल्ड पूरे वातावरण में रहते हैं. यह मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करता है जिन्हें स्वास्थ्य समस्याएं हैं या ऐसी इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं लेते हैं जो शरीर की रोगाणुओं और बीमारी से लड़ऩे की क्षमता कम करती हैं.

ये फंगस साइनस, दिमाग़ और फेफड़ों को प्रभावित करती है और डायबिटीज़ के मरीज़ों या बेहद कमज़ोर इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) वाले लोगों जैसे कैंसर या एचआईवी/एड्स के मरीज़ों में ये जानलेवा भी हो सकती है. म्यूकरमाइकोसिस में मृत्यु दर 50 प्रतिशत तक हो सकती है.

ब्लैक फंगस के लक्षण क्या हैं?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने ट्वीट कर बताया है कि आंखों में लालपन या दर्द, बुखार, खांसी, सिरदर्द, सांस में तकलीफ, साफ-साफ दिखाई नहीं देना, उल्टी में खून आना या मानसिक स्थिति में बदलाव ब्लैक फंगस के लक्षण हो सकते हैं.

4.अंटार्कटिका में टूटा दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड, जानें इसका आकार

अंटार्कटिका में दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड (आइसबर्ग) टूटकर अलग हो गया है. ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अंटार्कटिका (Antarctica) को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है. यहां बर्फ की चादर का पिघलना जारी है. उपग्रहों और विमानों से ली गईं तस्वीरों के अनुसार यह दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड है.

इस हिमखंड की लंबाई लगभग 170 किमी है जबकि इसकी चौड़ाई करीब 25 किमी है. यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के अनुसार अंटार्कटिका के वेडेल सागर में रोने आईस शेल्फ के पश्चिम हिस्‍से में हुआ है. इसका पता ईएसए ने कॉपरनिकस सेंटीनल सेटेलाइट से लगाया है.

वैज्ञानिकों ने इसे क्या नाम दिया?

ईएसए के अनुसार अब ये आइसबर्ग का टूटा हुआ विशाल हिमखंड वहां पर धीरे-धीरे आगे बह रहा है जो वैज्ञानिकों के लिए कौतूहल का कारण बना हुआ है. इस विशाल हिमखंड का पूरा आकार लगभग 4 हजार वर्ग किमी से भी अधिक है. वैज्ञानिकों ने इसको ए-76 नाम दिया है. इसका आकार न्‍यूयॉर्क के द्वीप पोर्टो रिको का करीब आधा है.

समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा

इस विशाल हिमखंड का पूरा आकार 4320 वर्ग किलोमीटर है. आइसबर्ग टूटने के इस घटना को यूरोपीय यूनियन के सैटेलाइट कापरनिकस सेंटीनल ने कैमरे में कैद किया है. यह सैटलाइट धरती के ध्रुवीय इलाके पर नजर रखता है. ब्रिटेन के अंटार्कटिक सर्वे दल ने सबसे पहले इस हिमखंड के टूटने की खबर दी थी.

जानकारों का कहना है कि हिमखंड के टूटने से सीधे समुद्र के जलस्‍तर में वृद्धि नहीं होगी लेकिन अप्रत्‍यक्ष रूप से जलस्‍तर बढ़ सकता है.  नेचर पत्रिका के अनुसार साल 1880 के बाद समुद्र के जलस्‍तर में औसतन 9 इंच की बढ़ोत्‍तरी हुई है. इनमें से एक तिहाई पानी ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फ पिघलने से आया है.

हिमखंड टूटने का कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण अंटार्कटिका की बर्फ की चादर गर्म होकर पिघल रही है. इस वजह से ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं. जैसे ही ग्लेशियर पीछे हटते हैं, बर्फ के टुकड़े टूट जाते हैं और समुद्र में तब तक तैरते रहते हैं जब तक कि वे पूरी तरह से अलग नहीं हो जाते या जमीन से टकरा नहीं जाते. पिछले साल भी दक्षिण जार्जिया में भी एक बड़ा हिमखंड टूटा था.

5.श्रीलंका दौरे पर भारतीय टीम के कोच होंगे राहुल द्रविड़

भारत के पूर्व कप्तान और वर्तमान राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA) के प्रमुख राहुल द्रविड़ जुलाई 2021 में श्रीलंका के खिलाफ तीन वनडे और तीन टी-20 मैचों के लिए टीम इंडिया के कोच होंगे. इससे पहले साल 2014 में इंग्लैंड दौरे के दौरान वह बल्लेबाजी सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं.

भातीय टीम को श्रीलंका दौरे पर तीन-तीन मैचों की वनडे और टी-20 सीरीज खेलनी है. टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री इंग्लैंड में विराट कोहली की टीम के साथ व्यस्त रहेंगे. इसके चलते राहुल द्रविड़ दूसरे दर्जे की भारतीय टीम के कोच होंगे.

राहुल द्रविड़ इससे पहले भी सीनियर टीम को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. वर्तमान में राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA) के प्रमुख द्रविड़ भारत ‘ए’ और अंडर 19 टीमों के कोच रह चुके हैं. सीनियर टीम के साथ द्रविड़ दूसरी बार जुड़ने जा रहे हैं. इससे पहले वह साल 2014 में इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के बल्लेबाजी सलाहकार बनकर गए थे.

भारतीय टीम 5 जुलाई को श्रीलंका पहुंचेगी

भारतीय टीम 5 जुलाई को श्रीलंका पहुंचेगी. जहां पर 3 वनडे मैच खेले जाएंगे. पहला मैच 13 जुलाई, दूसरा 16 जुलाई और तीसरा मैच 19 जुलाई को खेला जाएगा. इसके बाद तीन मैचों की टी-20 सीरीज खेली जाएगी. टी-20 सीरीज का पहला मैच 22 जुलाई, दूसरा मैच 24 जुलाई और तीसरा मैच 27 जुलाई को खेला जाएगा. सभी मैच कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में खेले जाएंगे.

भारतीय टीम के बड़े खिलाड़ी

भारतीय टीम के बड़े खिलाड़ी यूके में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप और इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेल रहे होंगे. यह दौरा जून से सितंबर तक चलेगा.

राहुल द्रविड़ के बारे में

राहुल द्रविड़ 2016 से 2019 तक इंडिया-ए (India-A Team) और अंडर-19 टीम के हेड कोच की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. उनके कोच रहते ही भारत की अंडर-19 टीम 2016 में विश्व कप की उपविजेता और 2018 में चैंपियन बनी थी.

सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर के बाद वे तीसरे ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में दस हज़ार से अधिक रन बनाये हैं. 182 से अधिक कैच के साथ वर्तमान में टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा कैच का रिकॉर्ड द्रविड़ के नाम है.

6.CM योगी आदित्यनाथ का बड़ा फैसला, कोरोना से अनाथ हुए बच्चों का जिम्मेदारी लेगी सरकार

यूपी में कोरोना महामारी के मरने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है. कोरोना महामारी ने कई घरों को उजाड़ दिया और बच्चों को अनाथ कर दिया है. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा किया है कि कोरोना महामारी के बीच अनाथ अथवा निराश्रित हुए बच्चों के लिए सरकार नीति लाएगी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संक्रमण के चलते अनाथ और निराश्रित हुए बच्चों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बीच प्रदेश के भीतर अनाथ अथवा निराश्रित हुए बच्चे अब राज्य की संपत्ति हैं, उनका ध्यान रखने के लिए राज्य सरकार की तरफ से सभी जिम्मेदारियां निभाई जाएंगी.

विभाग को दिए निर्देश

सरकारी योजना के अंतर्गत कोविड-19 के कारण जिन बच्चों के माता-पिता का देहांत हो गया है, उनके भरण-पोषण सहित सभी तरह की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा मुहैया कराई जाएगी. सरकार जल्द ही इस योजना के तहत बच्चों की देखभाल का ज़िम्मा उठाएगी. महिला एवं बाल विकास विभाग को इस संबंध में तत्काल विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं.

प्राइमरी स्‍कूल के छात्रों के लिए भत्ता

इससे पहले राज्‍य में लागू लॉकडाउन के दौरान बंद प्राइमरी स्‍कूल के छात्रों के लिए राज्‍य सरकार भत्ता और अनाज देने का घोषणा किया. उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग प्राइमरी स्कूलों के छात्रों को लॉकडाउन की अवधि के लिए मिड-डे मील का भत्ता और अनाज देगी.

सरकार द्वारा आवश्यक कदम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेशवासियों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. यूपी में कोरोना संक्रमण के नए मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है.

सरकार करवाएगी सर्वेक्षण

मुख्यमंत्री ने ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उन्हें सहारा प्रदान करने का निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब सभी जिलों में ऐसे बच्चों को चिन्हित करने के लिए सर्वेक्षण शुरू किया जाएगा. इनमें वे बच्चे भी शामिल हैं, जिनके परिजनों की कोरोना संक्रमण की जांच नहीं हो सकी, लेकिन माता-पिता का किन्ही भी वजहों से निधन हो गया. 

अधिक कोरोना केस वाला दुनिया का दूसरा देश

भारतीय चिकित्‍सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, देश में कोविड-19 के लिए अबतक 32,03,01,177 सैम्‍पल टेस्‍ट किए जा चुके हैं. वहीं, दुनिया में कोरोना के मामलों की बात की जाए तो भारत कुल 2.5 करोड़ से अधिक कोरोना वायरस केस वाला दुनिया का दूसरा देश है. इस मामले में पहले स्‍थान पर अमेरिका है. जबकि ब्राजील तीसरे स्‍थान पर है. ब्राजील में अबतक 1.60 करोड़ के करीब कोरोना के मामले आए हैं.

7.राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया का निधन

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया का 19 मई 2021 को निधन हो गया. राज्य सरकार ने उनके निधन पर एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है. वे 93 वर्ष के थे. पूर्व मुख्यमंत्री कोरोना संक्रमित थे. उनके निधन पर राजस्थान सरकार ने एक दिन के राजकीय शोक और सरकारी दफ्तरों में छुट्टी की घोषणा की है.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहाड़िया के निधन पर शोक जताया है. गहलोत ने ट्वीट किया कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया के निधन की खबर बेहद दुखद है. पहाड़िया ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री के रूप में लम्बे समय तक देश की सेवा की, वे देश के वरिष्ठ नेताओं में से थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया कि राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया जी के निधन से दुखी हूं. अपने लंबे राजनीतिक एवं प्रशासनिक करियर में उन्होंने सामाजिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया. उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं.

जगन्नाथ पहाड़िया राजनीतिक सफर

जगन्नाथ पहाड़िया 6 जून 1980 से 14 जुलाई 1981 तक सिर्फ 13 महीने ही राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे थे. लेकिन इस छोटे कार्यकाल में उन्होंने प्रदेश में पूरी तरह शराबबंदी लागू की. वे 1957, 1967, 1971 और 1980 में सांसद और 1980, 1985, 1999 और 2003 में विधायक भी रहे.

जगन्नाथ पहाड़िया इंदिरा गांधी कैबिनेट में मंत्री भी रहे थे. उनके पास वित्त, उद्योग, श्रम, कृषि जैसे विभाग थे. वे 1989 से 1990 तक एक साल के लिए बिहार और 2009 से 2014 तक हरियाणा के राज्यपाल भी रहे थे.

राजस्थान के पहले दलित मुख्यमंत्री

जगन्नाथ पहाड़िया राजस्थान के एक मात्र दलित मुख्यमंत्री रहे हैं. उनसे पहले और उनके बाद कोई दलित नेता राजस्थान में मुख्यमंत्री नहीं बना. भरतपुर के भुसावर में एक दलित परिवार में पैदा हुए पहाड़िया शुरू से ही बेबाक थे. उनकी बेबाकी ही उनके राजनीति में आने की वजह बनी.

जगन्नाथ पहाड़िया का जन्म

पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया का जन्म 15 जनवरी 1932 को भरतपुर जिले के भुसावर गांव में हुआ था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भरतपुर और वकालत जयपुर के राजस्थान विश्वविद्यालय से की थी.

8.ईरान का फरजाद-बी गैस फील्ड भारत के हाथ से निकला, जानिए क्या है पूरा मामला

ईरान हाल ही में भारत को बहुत बड़ा झटका दे दिया है. दरअसल, ईरान के पर्सियन गल्फ में मौजूद फरजाद-बी गैस फील्ड (Farzad-B Gas Field) भारत के हाथ से निकल गया है. अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच चीन के साथ दोस्‍ती बढ़ा रहे ईरान ने भारत को अरबों डॉलर का झटका दिया है.

ईरान ने इस विशाल गैस फील्ड को डेवलप करने का ठेका देश की एक स्‍थानीय कंपनी पेट्रोपार्स ग्रुप को दे दिया है. बता दें कि इस गैस फील्ड की खोज भारत की ओएनजीसी विदेश लिमिटेड ने की थी. ईरान ने अब इस गैस फील्‍ड को खुद ही विकसित करने का फैसला किया है.

2 अरब डॉलर के प्रस्ताव खारिज

ईरान ने इससे पहले चाबहार रेलवे लिंक परियोजना के लिए भारत के 2 अरब डॉलर के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. ईरान की सरकारी न्यूज सर्विस ‘शना’ की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल इरानियन ऑयल कंपनी (NIOC) ने भारत को झटका देते हुए इस गैस फील्ड को डेवलप करने का ठेका पेट्रोपार्स ग्रुप को दे दिया है.

यह समझौता कब हुआ?

नेशनल इरानियन ऑयल कंपनी और पेट्रोपार्स ग्रुप के बीच यह समझौता तेहरान में ईरान के पेट्रोलियम मंत्री की मौजूदगी में 17 मई 2021 को हुआ. बता दें कि फरजाद-बी गैस फील्‍ड में 23 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस रिजर्व है. इसमें से 60 प्रतिशत तक गैस निकाजी जा सकती है. इसके अतिरिक्त इस गैस फील्ड में गैस कंडेंनसेट्स हैं, जिसमें 5000 बैरल प्रति बिलियन क्यूबिक फीट गैस मौजूद है.

फरजाद-बी गैस फील्‍ड की खोज

रिपोर्ट के अनुसार, इस गैस फील्ड से अगले पांच साल तक हर रोज 2.8 करोड़ क्यूबिक मीटर गैस निकाली जा सकती है. फरजाद-बी गैस फील्‍ड की खोज ओएनजीसी विदेश लिमिटेड ने पर्शियन गल्फ यानी फारसी ऑफसोर एक्सप्लोरेशन ब्लॉक में साल 2008 में की थी.

11 बिलियन डॉलर निवेश करने की पेशकश

ओएनजीसी विदेश ने ईरान को इस गैस फील्ड को विकसित करने के लिए 11 बिलियन डॉलर निवेश करने की पेशकश दी थी. ईरान की नेशनल इरानियन ऑयल कंपनी भारत के इस प्रस्ताव पर वर्षों तक बैठी रही और अब यह पूरी तरह से भारत के हाथ से निकल गया है.

ईरान और चीन के बीच द्विपक्षीय व्‍यापार

ईरान और चीन ने अगले 10 साल में द्विपक्षीय व्‍यापार को 10 गुना बढ़ाकर 600 अरब डॉलर करने का लक्ष्‍य रखा है. चीन ईरान का सबसे बड़ा व्‍यापारिक भागीदार है. यही नहीं चीन ईरान में 5G सर्विस शुरू करने में मदद कर सकता है.

भारतीय निवेश के लिए संकट

चीन की ईरान में उपस्थिति से भारतीय निवेश के लिए संकट पैदा हो गया है. अमेरिका के दबाव की वजह से ईरान के साथ भारत के रिश्ते नाजुक दौर में हैं. भारत ने ईरान के बंदरगाह चाबहार के विकास पर अरबों रुपये खर्च किए हैं. भारत ने डील की शर्तों में बार-बार बदलाव और इसमें देरी के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है.

9.बिडेन ने हटाया स्वास्थ्य सेवा का खर्च उठाने में अक्षम अप्रवासियों पर लगा प्रतिबंध

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने 14 मई, 2021 को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा जारी वर्ष, 2019 की उस घोषणा को रद्द कर दिया है, जिसमें अप्रवासियों को वीजा प्राप्त करने से रोका गया था, जब तक कि वे यह सत्यापित नहीं कर सकते कि, अमेरिका में यह एक स्वीकृत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कवर किया जाएगा या स्वास्थ्य सेवा का खर्च वहन करेगा.

बिडेन ने एक बयान में यह कहा है कि, पिछली घोषणा अमेरिका के हितों को आगे बढ़ाने में मदद नहीं करती है. बिडेन ने पिछली उद्घोषणा को रद्द करने के दौरान यह कहा कि, यह उद्घोषणा 9945 में व्यक्त किए गए कारण ‘संयुक्त राज्य के हितों के लिए हानिकारक नहीं हैं’.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि, उनका प्रशासन ऐसे किसी भी आदेश, मार्गदर्शन दस्तावेजों, विनियमों, नीतियों और किसी भी अन्य समान एजेंसी के कार्यों की समीक्षा करेगा जो उद्घोषणा 9945 के लिए शुरू किए गए हैं, और संशोधित मार्गदर्शन जारी किये जायेंगे.

पदभार ग्रहण करने के समय से, बिडेन ने मुस्लिम-बहुल देशों पर ध्यान केंद्रित करते हुए ट्रम्प के यात्रा प्रतिबंध को निरस्त करने और ओबामा-युग के डिफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स (DACA) कार्यक्रम को रोकने के आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं.

बिडेन ने ‘नेशनल गार्डन ऑफ अमेरिकन हीरोज’ को भी रद्द कर दिया था जिसके लिए ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल आदेश जारी किया था.

ट्रंप ने 2019 में अप्रवासियों पर प्रतिबंध क्यों जारी किया?

• पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वर्ष, 2019 में उन अप्रवासियों पर प्रतिबंध लगा दिया था जो अमेरिका में स्वास्थ्य सेवा का खर्च नहीं उठा सकते. इस प्रतिबंध को उद्घोषणा 9945 के तौर पर भी जाना जाता था.
• उद्घोषणा 9945 ने ऐसे अप्रवासियों के प्रवेश को निलंबित करने की घोषणा की थी जो अमेरिकियों के लिए स्वास्थ्य देखभाल लाभों की उपलब्धता की रक्षा के लिए अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली पर आर्थिक रूप से बोझ डालेंगे.
• पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उद्घोषणा 9945 जारी करने के दौरान यह कहा था कि, अमेरिका में स्वास्थ्य देखभाल के लिए भुगतान करने की क्षमता की कमी वाले अप्रवासियों का अप्रतिबंधित प्रवेश संयुक्त राज्य के हितों के लिए हानिकारक होगा.
• ट्रम्प प्रशासन द्वारा जारी की गई उद्घोषणा 9945 में गैर-नागरिकों को अमेरिका में प्रवेश करने के 30 दिनों के भीतर, यह सत्यापित करने की आवश्यकता है कि वे स्वास्थ्य बीमा प्राप्त कर सकते हैं या इसके तहत कवर किए जाएंगे.
• शरणार्थियों और अमेरिकी नागरिकों के बच्चों को इस उद्घोषणा से छूट दी गई थी

10.जानिये क्यों कॉमन क्रेन पक्षी 300 से अधिक वर्षों के बाद लौट आये आयरलैंड

common krane

कॉमन क्रेन, आयरलैंड से गायब होने के तीन सौ से अधिक वर्षों के बाद, इस द्वीप देश में वापस आ गया है. कॉमन क्रेन एक ऐसा पक्षी है जो आयरलैंड की लोककथाओं, इतिहास और संस्कृति का हिस्सा रहा है और मध्ययुग के दौरान यह एक लोकप्रिय पालतू पक्षी भी था.

वर्ष, 2020 में एक बहाल (रिस्टोर्ड) पीट बोग पर क्रेन की एक जोड़ी देखी गई थी. यह एक प्रकार की आर्द्रभूमि (वेट लैंड) है जो ज्यादातर उत्तरी अक्षांश में स्थित देशों में पाई जाती है. कथित तौर पर, यह पक्षी आयरलैंड के मिडलैंड्स क्षेत्र में देखे गये हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा के लिए ही इनके सटीक स्थान को गुप्त रखा गया है.

कॉमन क्रेन के बारे में

कॉमन क्रेन (सामान्य सारस) आमतौर पर आयरलैंड में सर्दियों के दौरान देखी जाती है, हालांकि प्रजनन के मौसम के दौरान इसे नहीं देखा जाता है. वर्ष, 2020 में 300 से अधिक वर्षों के बाद, यह पहली बार था कि प्रजनन के मौसम के दौरान आयरलैंड में कॉमन क्रेन को घोंसला बनाते हुए देखा गया था.

इन कॉमन क्रेन पक्षियों की ऊंचाई 04 फीट और पंखों का फैलाव 07 फीट से अधिक होता है. यह आयरलैंड का सबसे बड़ा पक्षी हुआ करता था. ये पक्षी कभी आयरलैंड में सब जगह पाए जाते थे लेकिन, इनके आवास के विनाश ने इन्हें 16 वीं और 17 वीं शताब्दी के आसपास आयरलैंड से गायब कर दिया.

कॉमन क्रेन का दिखना क्यों महत्वपूर्ण है?

पारिस्थितिक विज्ञानी मार्क मैककॉरी के अनुसार, इन क्रेन्स के घोंसले में क्रेन्स के जोड़े की वापसी अत्यंत महत्वपूर्ण थी. इसलिए वर्ष, 2020 में जब इन पक्षियों की खोज की गई, तो वे प्रजनन के मौसम में घोंसले में रहने वाले पहले जोड़े थे. इसलिए, यह एक अच्छा संकेत है, क्योंकि ऐसा लग रहा है कि ये पक्षी आयरलैंड को एक बार फिर से अपना निवास स्थल बनाने के लिए तैयार हैं.

इन पक्षियों ने पिछले साल अंडे नहीं दिए, जो क्रेन्स के लिए बहुत असामान्य बात नहीं है.

क्या कॉमन क्रेन पक्षी आयरलैंड में फिर से अपना निवास स्थान बना रहे हैं?

जैसेकि वर्ष, 2020 में डबलिन में एक अन्य किशोर क्रेन को देखा गया था, यह सुझाव दिया गया है कि कॉमन क्रेन आयरलैंड में फिर से लौट रहे हैं.

इन कॉमन क्रेन्स को बोर्ड ना मोना की भूमि पर देखा गया है. यह एक अर्ध-राज्य कंपनी है जो इस क्षेत्र में दलदल से पीट ईंधन निकालने के लिए जानी जाती है. हालांकि, इस कंपनी ने जनवरी, 2021 में अक्षय ऊर्जा को अपनाने और आर्द्रभूमि निकायों के पुनर्वास के लिए अपने कटाई कार्यों को बंद कर दिया था.

दलदल बहाली का महत्व

यह दलदली क्षेत्र स्पंजी, नरम आर्द्रभूमि है जिसमें पीट – एक जीवाश्म ईंधन – जमा होते हैं और जिसका उपयोग उत्तरी यूरोप में व्यवसायों और घरों को गर्म करने के लिए किया जाता है.

इन आर्द्रभूमियों को बहाल (रिस्टोर) करने के लिए अब दुनिया भर में प्रयास चल रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, आयरलैंड में दलदलों के ठीक होने पर, ऐसी संभावना है कि कॉमन क्रेन्स उन क्षेत्रों में फिर से बस जायें.

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