E RUPI India PM Modi Will Launch Today| PM मोदी आज लॉन्च करेंगे e-RUPI

By | August 2, 2021

E RUPI India PM Modi Will Launch Today PM मोदी आज लॉन्च करेंगे e-RUPI; इससे बिना रुकावट मिल सकेगा योजनाओं का फायदा, जानें इससे जुड़ी 9 खास बातें.

E RUPI India PM Modi Will Launch Today
E RUPI India PM Modi Will Launch Today

E RUPI India PM Modi Will Launch Today PM मोदी आज लॉन्च करेंगे e-RUPI; इससे बिना रुकावट मिल सकेगा योजनाओं का फायदा, जानें इससे जुड़ी 9 खास बातें. देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ई-वाउचर-बेस्ड डिजिटल पेमेंट सॉल्यूशन ई-रुपी (e-RUPI) लॉन्च करेंगे. ई-रुपी एक प्रीपेड ई-वाउचर है, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने विकसित किया है. इसके जरिए कैशलेस और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट होगा. सरकार के अनुसार इसके जरिए योजनाओं का लाभ आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. हम आपको इसके फायदों के बारे में बता रहे हैं.

E RUPI India PM Modi Will Launch Today

E Rupi 9 Important Point
E Rupi 9 Important Point

E RUPI India PM Modi Will Launch Today इससे होंगे ये 9 फायदे

  1. ये एक कैशलेस और कॉन्टैक्टलेस तरीका है.
  2. ये सेवा देने और लेने वालों को सीधे तौर पर जोड़ता है.
  3. इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों को मिलेगा। इससे भ्रष्टाचार में कमी आएगी.
  4. यह एक QR कोड या SMS स्ट्रिंग-बेस्ड ई-वाउचर है, जिसे सीधे लाभार्थियों के मोबाइल पर भेजा जाता है.
  5. इस वन टाइम पेमेंट सर्विस में यूजर्स बिना कार्ड, डिजिटल पेमेंट ऐप या इंटरनेट बैंकिंग के बावजूद वाउचर को रिडीम कर सकेंगे.
  6. e-RUPI के जरिए सरकारी योजनाओं से जुड़े विभाग या संस्थान बिना फिजिकल कॉन्टैक्ट के सीधे तौर पर लाभार्थियों और सर्विस प्रोवाइडर से जुड़े रहेंगे.
  7. इसमें यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि लेन-देन पूरा होने के बाद ही सर्विस प्रोवाइडर को भुगतान किया जाए.
  8. प्रीपेड होने की वजह से यह किसी भी मध्यस्थ को शामिल किए बिना सर्विस प्रोवाइडर का समय पर भुगतान करता है.
  9. इन डिजिटल वाउचर का उपयोग प्राइवेट सेक्टर में अपने इम्प्लॉई वेलफेयर और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी कार्यक्रमों के लिए भी किया जा सकता है.

E RUPI India

भारत में जल्द ही लेन-देन का तरीका बदलने वाला है. आपको रुपए का विकल्प मिल रहा है. होगा तो वह भी रुपया ही, जारी भी रिजर्व बैंक ही करेगा, पर वह प्रिंटेड नोट से बिल्कुल ही अलग होगा. रिजर्व बैंक ही नहीं बल्कि दुनियाभर के केंद्रीय बैंक बिटकॉइन, ईथर जैसी प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी के विकल्प के तौर पर डिजिटल करेंसी पर काम कर रहे हैं.

पिछले हफ्ते रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर ने विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी के वेबिनार में कहा कि भारत को भी डिजिटल करेंसी की जरूरत है. यह बिटकॉइन जैसी प्राइवेट वर्चुअल करेंसी यानी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश से होने वाले नुकसान से बचाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रिजर्व बैंक इस पर काम कर रहा है.

आइए जानते हैं कि यह डिजिटल रुपया करेंसी नोट से कितना अलग होगा? क्या इसमें भी बिटकॉइन की तरह निवेश किया जा सकेगा? बैंकों की क्या भूमिका रह जाएगी? हम जो डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं, उनसे यह डिजिटल रुपया किस तरह अलग होगा?

सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी CBDC क्या है?

  • यह कैश का इलेक्ट्रॉनिक रूप है. जैसे आप कैश का लेन-देन करते हैं, वैसे ही आप डिजिटल करेंसी का लेन-देन भी कर सकेंगे. CBDC कुछ हद तक क्रिप्टोकरेंसी (बिटकॉइन या ईथर जैसी) जैसे काम करती है. इससे ट्रांजैक्शन बिना किसी मध्यस्थ या बैंक के हो जाता है. रिजर्व बैंक से डिजिटल करेंसी आपको मिलेगी और आप जिसे पेमेंट या ट्रांसफर करेंगे, उसके पास पहुंच जाएगी. न तो किसी वॉलेट में जाएगी और न ही बैंक अकाउंट में. बिल्कुल कैश की तरह काम करेगी, पर होगी डिजिटल.
Cash Flow to End User
Cash Flow to End User

यह डिजिटल रुपया, डिजिटल पेमेंट से कैसे अलग है?

  • बहुत अलग है. आपको लग रहा होगा कि डिजिटल ट्रांजैक्शन तो बैंक ट्रांसफर, डिजिटल वॉलेट्स या कार्ड पेमेंट्स से हो ही रहे हैं, तब डिजिटल करेंसी अलग कैसे हो गई?
  • यह समझना बेहद जरूरी है कि ज्यादातर डिजिटल पेमेंट्स चेक की तरह काम करते हैं. आप बैंक को निर्देश देते हैं. वह आपके अकाउंट में जमा राशि से ‘वास्तविक’ रुपए का पेमेंट या ट्रांजैक्शन करता है. हर डिजिटल ट्रांजैक्शन में कई संस्थाएं, लोग शामिल होते हैं, जो इस प्रोसेस को पूरा करते हैं.
  • उदाहरण के लिए अगर आपने क्रेडिट कार्ड से कोई पेमेंट किया तो क्या तत्काल सामने वाले को मिल गया? नहीं. डिजिटल पेमेंट सामने वाले के अकाउंट में पहुंचने के लिए एक मिनट से 48 घंटे तक ले लेता है. यानी पेमेंट तत्काल नहीं होता, उसकी एक प्रक्रिया है.
  • जब आप डिजिटल करेंसी या डिजिटल रुपया की बात करते हैं तो आपने भुगतान किया और सामने वाले को मिल गया. यह ही इसकी खूबी है. अभी हो रहे डिजिटल ट्रांजैक्श. किसी बैंक के खाते में जमा रुपए का ट्रांसफर है. पर CBDC तो करेंसी नोट्स की जगह लेने वाले हैं.
Benifits of E RUPI
Benifits of E RUPI

यह डिजिटल रुपया बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी से कैसे अलग होगा?

  • डिजिटल करेंसी का कंसेप्ट नया नहीं है. यह बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी से आया है, जो 2009 में लॉन्च हो गई थी. इसके बाद ईथर, डॉगेकॉइन से लेकर पचासों क्रिप्टोकरेंसी लॉन्च हो चुकी हैं. पिछले कुछ वर्षों में यह एक नए असेट क्लास के रूप में विकसित हुई है, जिसमें लोग इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं.
  • प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी प्राइवेट लोग या कंपनियां जारी करती हैं. इससे इसकी मॉनिटरिंग नहीं होती. गुमनाम रहकर भी लोग ट्रांजैक्शन कर रहे हैं, जिससे आतंकी घटनाओं व गैरकानूनी गतिविधियों में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल हो रहा है. इन्हें किसी भी केंद्रीय बैंक का सपोर्ट नहीं है. यह करेंसी लिमिटेड है, इस वजह से सप्लाई और डिमांड के अनुसार इसकी कीमत घटती-बढ़ती है. एक बिटकॉइन की वैल्यू में ही 50% तक की गिरावट दर्ज हुई है.
  • पर जब आप प्रस्तावित डिजिटल रुपया की बात करते हैं तो इसे दुनियाभर में केंद्रीय बैंक यानी हमारे यहां रिजर्व बैंक लॉन्च कर रहा है. न तो क्वांटिटी की सीमा है और न ही फाइनेंशियल और मौद्रिक स्थिरता का मुद्दा. एक रुपए का सिक्का और डिजिटल रुपया समान ताकत रखता है. पर डिजिटल रुपए की मॉनिटरिंग हो सकेगी और किसके पास कितने पैसे हैं, यह रिजर्व बैंक को पता होगा.
  • हालांकि, भारत के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज में से एक वजीरएक्स में एवीपी-मार्केटिंग परीन लाठिया कहते हैं कि रिजर्व बैंक के डिजिटल करेंसी लॉन्च करने से बिटकॉइन या क्रिप्टोकरेंसी पर कोई असर नहीं पड़ेगा. क्रिप्टोकरेंसी एक तरह की असेट बन चुकी है, जिसका दुनियाभर में ट्रेड होता रहेगा. भारत इसमें पीछे नहीं रह सकता.
World Digital Payment Ratio
World Digital Payment Ratio

क्या अब तक किसी देश ने डिजिटल करेंसी लॉन्च की है?

  • हां. छह साल की रिसर्च के बाद पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने अप्रैल 2020 में दो पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए. लॉटरी सिस्टम से ई-युआन बांटे गए. जून 2021 तक 2.4 करोड़ लोगों और कंपनियों ने e-CNY यानी डिजिटल युआन के वॉलेट बना लिए थे.
  • चीन में 3450 करोड़ डिजिटल युआन (40 हजार करोड़ रुपए) का लेन-देन यूटिलिटी बिल्स, रेस्टोरेंट व ट्रांसपोर्ट में हो चुका है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट कहती है कि 2025 तक डिजिटल युआन की चीनी इकोनॉमी में हिस्सेदारी 9% तक हो जाएगी. अगर सफल रहा तो चीन पूरी दुनिया में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी लॉन्च करने वाला पहला देश बन जाएगा.
  • जनवरी 2021 में बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स ने बताया कि दुनियाभर के 86% केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी पर काम कर रहे हैं. बहामास जैसे छोटे देश ने तो हाल ही में CBDC के तौर पर सैंड डॉलर लॉन्च भी कर दिया है.
  • कनाडा, जापान, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, यूके और यूनाइटेड स्टेट्स के साथ-साथ यूरोपीय यूनियन भी बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के साथ मिलकर डिजिटल करेंसी पर काम कर रहे हैं. इससे डिजिटल करेंसी से लेन-देन जल्द ही हकीकत बनने वाला है.

दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों की डिजिटल करेंसी में रुचि क्यों बढ़ी है?

डिजिटल करेंसी से चार बड़े फायदे हैं-

  • एफिशियंसीः यह कम खर्चीली है. ट्रांजैक्शन भी तेजी से हो सकते हैं. इसके मुकाबले करेंसी नोट्स का प्रिटिंग खर्च, लेन-देन की लागत भी अधिक है.
  • फाइनेंशियल इनक्लूजनः डिजिटल करेंसी के लिए किसी व्यक्ति को बैंक खाते की जरूरत नहीं है. यह ऑफलाइन भी हो सकता है.
  • भ्रष्टाचार पर रोकः डिजिटल करेंसी पर सरकार की नजर रहेगी. डिजिटल रुपए की ट्रैकिंग हो सकेगी, जो कैश के साथ संभव नहीं है.
  • मॉनेटरी पॉलिसीः रिजर्व बैंक के हाथ में होगा कि डिजिटल रुपया कितना और कब जारी करना है. मार्केट में रुपए की अधिकता या कमी को मैनेज किया जा सकेगा.
Digital Currency in India and China
Digital Currency in India and China

भारत में रिजर्व बैंक ने डिजिटल करेंसी पर क्या काम किया है?

  • भारत में दो-तीन साल से डिजिटल करेंसी की बात हो रही है. पर रिजर्व बैंक ने न तो कोई रिसर्च पब्लिश की है और न ही कोई पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है. रिजर्व बैंक का डिजिटल पेमेंट्स का वेबपेज बताता है कि CBDC के विकल्पों की पड़ताल जारी है.
  • समस्या यह भी है कि किसी भी देश में बड़े स्तर पर डिजिटल करेंसी जारी नहीं हुई है. चीन में भी पायलट प्रोजेक्ट ही चल रहे हैं. इस वजह से कोई मॉडल सामने नहीं है, जिसे देखकर काम किया जा सके और उसे अपनाया जा सके. चीन ने डिजिटल युआन के पेटेंट की कोशिशें तेज कर दी हैं.
  • रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कुछ दिन पहले कहा था कि डिजिटल करेंसी पर हमारा काम चल रहा है, पर टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन से जुड़ी चुनौतियां हैं. फाइनेंशियल स्टेबिलिटी भी देखनी होगी.
  • हाल ही में 2021 क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल जारी हुआ है. इसे भारत के डिजिटल रुपए की दिशा में बड़ा कदम कहा जा रहा है. पर यह बिल सिर्फ कानूनी ढांचा बताता है. डिजाइन प्लान और लागू करने की प्रक्रिया इसमें स्पष्ट नहीं है.

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